BJP में परवेश वर्मा बनाम मनोज तिवारी, दिल्ली में वोटिंग से पहले CM की दावेदारी

दिल्ली विधानसभा चुनाव का आगाज हुआ तो बीजेपी के प्रमुख चेहरे के तौर पर मनोज तिवारी सबसे आगे नजर आ रहे थे, लेकिन चुनाव में सियासी पारा चढ़ने के साथ-साथ पार्टी संसद परवेश वर्मा का भी सियासी कद बढ़ता गया. दिल्ली चुनाव प्रचार में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शाहीन बाग के मुद्दे पर आक्रमक रुख अख्तियार किया तो परवेश वर्मा ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाकर चुनावी फिजा को बीजेपी के पक्ष में मोड़ने की पुरजोर कोशिश की. इसलिए अगर बीजेपी 22 साल के सत्ता का वनवास को दिल्ली में खत्म करने में कामयाब रहती है तो सीएम के पद को लेकर मनोज तिवारी और परवेश वर्मा के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है.


विरासत से सिसायत में आए पश्चिम दिल्ली के सांसद परवेश वर्मा दिल्ली चुनाव में अपने बयानों के जरिए बीजेपी का चर्चित चेहरा बनकर उभरे हैं. परवेश वर्मा ने प्रचार करते हुए कहा था, 'शाहीन बाग में लाखों लोग जमा होते हैं. दिल्ली के लोगों को सोचना होगा. फैसला करना होगा. एक दिन वे आपके घरों में घुसेंगे, आपकी बहन-बेटियों से बलात्कार करेंगे, उनका कत्ल कर देंगे. अब भी वक्त है. कल को मोदी जी और अमित शाह आपको बचाने नहीं आ पाएंगे.'


परवेश वर्मा को अपने विवादित बयानों के लिए बीजेपी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट से बाहर होना पड़ा, जिसके बाद भी वो लगातार बयान देते रहे. इसके बाद चुनाव अयोग ने अब उनके प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन परवेश वर्मा दिल्ली चुनाव प्रचार से बीजेपी में फायर ब्रांड नेता के तौर पर अपनी छवि गढ़ने में कामयाब रहे हैं. बीजेपी दिल्ली में केजरीवाल को मात देकर कमल खिलाने में कामयाब रहती है या नहीं ये तो 11 फरवरी को पता चलेगा, लेकिन परवेश वर्मा अपने सियासी कद को नया तेवर और ऊंचाई देने में सफल रहे हैं. हाल ही में परवेश वर्मा के विवादित भाषणों को इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा सकता है.


परवेश वर्मा का कद उस समय भी बढ़ता दिख गया था जब जनवरी माह में बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन 'पंच परमेश्वर' में उन्होंने पूरा मंच अकेले संभाल रखा था. 'बूथ जीता, चुनाव जीता' के नारे से चुनावी मुहिम का आगाज करते हुए भी अमित शाह ने न सिर्फ परवेश वर्मा की तारीफ की, बल्कि उन्हें पार्टी का बड़ा नेता करार दे दिया था.