भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो दर 5.15 फीसदी पर बरकरार रहेगी। इसलिए कर्ज लेने वालों को कोई राहत नहीं मिली है। इससे पहले पांच दिसंबर को भी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था। बता दें कि केंद्रीय बैंक खुदरा महंगाई को ध्यान में रखते हुए प्रमुख नीतिगत दरों पर फैसला लेता है। 2019 में रेपो दर में कुल 135 आधार अंकों की कटौती हुई थी। नौ सालों में पहली बार रेपो रेट इतना कम है। मार्च, 2010 के बाद यह रेपो रेट का सबसे निचला स्तर है। वहीं, रिवर्स रेपो रेट 4.90 फीसदी पर बरकरार है। सीआरआर चार फीसदी पर है, एसएलआर 18.25 फीसदी और बैंक रेट 5.40 फीसदी पर। रिजर्व बैंक ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो दर यथावत रखने का पक्ष लिया।
जीडीपी पर जताया अनुमान
साथ ही बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-21 में देश की जीडीपी ग्रोथ छह फीसदी रहेगी। वहीं, आगामी वित्त वर्ष की पहले छह महीने में वृद्धि दर 5.5 फीसदी से छह फीसदी रहने का अनुमान लगया है। जबकि, वित्त की तीसरी तिमाही में वृद्धि दर 6.2 फीसदी रहने का अनुमान है।
रियल एस्टेट सेक्टर पर किया बड़ा एलान
इसके साथ ही आरबीआई ने कमर्शियल रियल्टी लोन लेने वालों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उचित कारणों से देरी पर लोन डाउनग्रेड नहीं होगा। यानी अगर कोई डेवल्पर किसी वजह से कर्ज समय पर नहीं चुका पाता है, तो उसे एक साल तक एनपीए घोषित नहीं किया जाएगा। इससे रियल्टी सेक्टर को काफी राहत मिली है।
महंगाई पर कही ये बात
रिजर्व बैंक ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया है। इस संदर्भ में रिजर्व बैंक ने कहा है कि आने वाले समय में मुद्रास्फीति पर खाद्य मुद्रास्फीति, कच्चे तेल की कीमतों और सेवाओं की लागत जैसे कई कारकों का असर होगा। चौथी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी अधिक स्पष्ट दिखेगी। उसने कहा कि हालिया महीनों में सेवा लागत में वृद्धि देखने को मिली है। खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 2020-21 की पहली दो तिमाहियों में 5.4-5 फीसदी और 2020-21 की तीसरी तिमाही में 3.2 फीसदी किया है।
आरबीआई गवर्नर ने दिया बयान
इस संदर्भ में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर की गति बढ़ाने के लिये मुख्य ब्याज दर में घट-बढ़ करने के अलावा और भी कई अन्य उपाय हैं। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति का परिदृश्य बेहद अनिश्चित बना हुआ है।
दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा परिणाम जारी करने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, 'रिजर्व बैंक के पास आर्थिक वृद्धि दर में जारी नरमी से निपटने के लिए और भी कई अन्य उपाय हैं।' आगे उन्होंने कहा कि, 'भले ही इस बार का निर्णय अनुमानों के अनुरूप है, लेकिन रिजर्व बैंक की भूमिका को कम नहीं आंकना चाहिए।'
दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा परिणाम जारी करने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, 'रिजर्व बैंक के पास आर्थिक वृद्धि दर में जारी नरमी से निपटने के लिए और भी कई अन्य उपाय हैं।' आगे उन्होंने कहा कि, 'भले ही इस बार का निर्णय अनुमानों के अनुरूप है, लेकिन रिजर्व बैंक की भूमिका को कम नहीं आंकना चाहिए।'
सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन बनाने का प्रस्ताव
केंद्रीय बैंक ने डिजिटल पेमेंट को लेकर ग्राहकों की सुरक्षा और लागत को लेकर अप्रैल 2020 तक एक सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन (SRO) बनाने का प्रस्ताव भी किया है। भारतीय रिजर्व बैंक अप्रैल 2020 तक डिजिटल पेमेंट सिस्टम के लिए एसआरओ स्थापित करने के लिए एक खाका पेश करेगा। बता दें कि इसका उद्देश्य ग्राहक के हित की सुरक्षा और लागत को लेकर सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया अपनाने को प्रोत्साहित करना होगा।
चार फरवरी को शुरू हुई थी बैठक
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक चार फरवरी को शुरू हुई थी। इसमें रेपो रेट पर कोई फैसला करते समय खुदरा महंगाई को ध्यान में रखा जाता है, जो पांच फीसदी से ज्यादा पहुंच चुकी है।